22/11/2017

कैसे जानें खाना खाते वक़्त कि पेट भर गया है?


एक औसत व्यक्ति का पेट अथवा आमाशय लगभग 4 लीटर का होता है एवं इतनी मात्रा में भोजन ले पाना नामुमकिन होता है तो फिर कैसे हमें पेट भरा जाने का एहसास होता है?

प्रतिक्रिया तंत्र

दरअसल पेट भर जाने अथवा तृप्ति के संकेत हमें हमारा मस्तिष्क पेट को भेजता है। जब भी हम भोजन करते हैं तो पेट में खिंचाव शुरू होने लगता है और पेट के स्ट्रेच रिसेप्टर हमारे मस्तिष्क को सिग्नल भेजने लगते हैं और मस्तिष्क उन सिग्नल का विश्लेषण करके एक समय के बाद हमें संकेत भेजने लगता है कि अब और अधिक मात्रा में भोजन की आवश्यकता नहीं है और हम तृप्ति की अनुभूति करने लगते हैं। इसके अलावा भोजन के प्रकार का भी तृप्ति से सम्बन्ध है।

समय

मस्तिष्क तक स्ट्रेच के सिग्नल पहुँचने में लगभग 20 मिनट का समय लगता है इसलिए पेट भरा जाने के एहसास का समय से भी सीधा सम्बन्ध है। वज़न कम करने के लिहाज़ से भी यह बात महत्वपूर्ण है। आपको अपना भोजन हमेशा धीरे-धीरे स्वाद लेकर और अच्छी तरह चबाकर करना चाहिए।

कैसे जानें खाना खाते वक़्त कि पेट भर गया है?

ज़रूरी नहीं है कि आप तब तक ही भोजन करते रहें जब तक कि आपको पूरी तरह से पेट भर जाने का एहसास होने लगे. दरअसल यह तो एक survival mechanism है जो हमें पाचन क्षमता से अधिक भोजन ना करने का संकेत देता है. यदि आप मस्तिष्क में गंध-स्वाद की बजाय भोजन का अनुभव पेट में करेंगे तो आपको अंदाज़ा लग जायेगा कि आवश्यकता के अनुरूप भोजन किया जा चुका है.

02/04/2017

कहीं आप भी तो टीवी देखते हुए खाना नहीं खाते?


आजकल अकसर यह देखने में आता है कि लोग खाना खाते वक़्त टीवी ज़रूर देखते हैं। देखने में तो यह कोई बड़ी चिंता की बात नहीं लगती लेकिन हाल ही में हुए शोधों पर यकीन किया जाए तो खाते वक़्त टीवी देखना मोटापे और डायबिटीज़ होने के कई कारणों में से एक हो सकता है।

सामान्यतया खाना खाते समय हमारा अवचेतन मन खाने से जुड़े कई पहलुओं पर गौर करता है जैसे कि उसका स्वाद, तापमान, पोषण, भार एवं रसीलापन इत्यादि। हमारा मस्तिष्क सभी तरह की गणनाओं के बाद यह निष्कर्ष निकालता है कि कितना भोजन कर चुकने के बाद जिह्वा को सन्देश देना है कि आवश्यकतानुरूप भोजन कर लिया जा चुका है। सरल शब्दों में कहा जाए दिमाग हमें सन्देश देता है कि अब बस किया जाना चाहिए। लेकिन जब हम टीवी देखते हुए भोजन करते हैं तो हमारा अवचेतन भोजन की बजाय टीवी पर चल रहे कार्यक्रम के अनुरूप संचालित होने लगता है और वह अपना ध्यान भोजन से जुड़ी गणनाओं पर केंद्रित नहीं कर पाता। ऐसे में हमें पता नहीं चलता कि कितना भोजन किया जाना चाहिए और हम पूरी तरह से पेट भर जाने पर आवश्यकता से अधिक भोजन कर चुकते हैं।

इसके अलावा टीवी देखते समय हमारा बैठने का तरीका भी हमारे पाचन पर बुरा असर डालता है। सामान्यतया खाना खाते समय हमारी गर्दन कुछ नीचे की ओर झुकी हुई होती है परंतु टीवी देखते समय यह अपनी सामान्य अवस्था में नहीं रह पाती। अधिक समय तक ऐसा किये जाने पर हमारे पाचनतंत्र पर बुरा असर पड़ता है।

इसलिए भोजन हमेशा एकांत में मग्न होकर ही किया जाना चाहिए। टीवी,लैपटॉप और फ़ोन तो हम कभी भी इस्तेमाल कर सकते हैं बेहतर होगा कि खाना खाते समय हमारा सम्पूर्ण ध्यान भोजन पर ही रहे। यह सेहत के लिए तो महत्वपूर्ण है ही साथ यह उसके लिए भी सम्मानजनक है जिसने आपके लिए इतनी मेहनत से भोजन तैयार किया है।

22/02/2017

वैज्ञानिकों ने तैयार किया रोते हुए बच्चे को हंसाने वाला गाना

एक रोते हुए बच्चे को हंसाना हर किसी के बूते की बात नहीं इसलिए वैज्ञानिकों की मदद से एक ऐसा गाना तैयार किया गया है जिसे सुनके रोता हुआ बच्चा भी हंस पड़े।

दरअसल बच्चे के मन पर कुछ विशेष ध्वनियां और उनका क्रम प्रभाव डालती हैं।  इसी तथ्य के आधार पर 2016 में लंदन विश्विद्यालय के बालविकास विशेषज्ञ कैस्पर एडीमन ने यूके की बेबी फ़ूड बनाने वाली कंपनी काऊ एंड गेट के लिए एक गाना तैयार किया।

गाना तैयार होने के बाद 7 परिवारों को नियमित रूप से अपने बच्चों को यह गाना सुनाने के लिए कहा गया। इस प्रयोग का परिणाम आशा के अनुरूप निकला और बच्चों के मूड में काफी परिवर्तन दिखाई दिया।

गाने का वीडियो:



Bring! Bring! On the bicycle
Beep! Beep! In the car
Ping! Ping! A submarine
Phew! Phew! helicopter
A choo-choo train
An aeroplane
A "wee!" down the slide

I just adore-dore-dore
You every day more
Wherever we are

So up in the sky
And deep in the ocean
Through valleys and hills
Away we go


Bring! Bring! On the bicycle
Beep! Beep! In the car
Ping! Ping! A submarine
Phew! Phew! helicopter
A choo-choo train
An aeroplane
A rocket to the stars!

There's a dance-dance-dance
Going on in my heart
Wherever we are

So up in the sky
And deep in the ocean
Through valleys and hills
Away we go

You little monkey
You're staying up late
Who purrs like a cat
When they get their own
Who then turns into a lion
Who lets out a...

(RAWR!)

I love-love-love
You every day more
Whatever's in store

So up in the sky
And deep in the ocean
Through valleys and hills
Away we go

So up in the sky
And deep in the ocean
Through valleys and hills
Away we go

06/02/2017

लाइलाज नहीं है गठिया, निश्चित लाभ के लिए करें ये उपचार

आम धारणा है कि गठिया अथवा arthritis रोग का कोई इलाज नहीं है। इस रोग में यूरिक एसिड बढ़ जाता है जिसके कारण रोगी को बहुत दर्द का अनुभव होता है। ऐलोपैथी में इसका इलाज नहीं है, पाश्चात्य चिकित्सा प्रणाली में इसमें डॉक्टर मरीजों को पेन किलर देते रहते हैं जिससे मरीज़ का थोड़ी राहत तो मिल जाती है लेकिन इससे रोग की गंभीरता और भी बढ़ती चली जाती है। इस रोग में हड्डियाँ भी टेढ़ी मेढ़ी हो जाती हैं जिससे रोगी का सामान्य रूप से चलना-फिरना आदि भी मुश्किल होता चला जाता है। इसके विपरीत आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में गठिया को जड़ से समाप्त किया जा सकता है।

निम्न प्रकार से चिकित्सा करने पर गठिया का रोगी स्वस्थ हो सकता है। ये सारे उपाय ऐसे हैं जिन्हें आसानी से घर पे ही  किया जा सकता है और इसके कोई साइड इफ़ेक्ट्स भी नहीं है।

गठिया रोग के घरेलू उपचार

1. मेथी गठिया या arthritis में बहुत प्रभावशाली है। किसी भी प्रकार से उपयोग करने पर इसमें फायदा होता है। चूँकि इसकी तासीर बहुत गरम होती है तो जिन्हें गर्मी अपच आदि की शिकायत हो रात को मेथी को पानी में भिगोकर रख दें और सुबह उसको खाली पेट खा लें।

2. हल्दी, मेथी और सौंठ सबको समान भाग में मिलाकर पीसकर रख लें और सुबह-शाम नित्य इसका 1-1 चम्मच सेवन करें। जिनको एसिडिटी या बवासीर की शिकायत हो तो वे इसका अल्प मात्रा में ही सेवन करें।

3. सुबह नित्य 1-2 कली लहसुन की नित्य खाएं।

4. गठिया रोग में मोथा घास के सेवन बहुत ही प्रभावकारी है। गठिया के मरीजों को इसे सुखाकर पाउडर कर रोज़ 1-2 चम्मच ना चाहिए।

5. एलोवेरा (घृतकुमारी या गंवारपाठा) का जूस भी गठिया में बहुत ही प्रभावकारी है।

गठिया का आयुर्वेदिक इलाज

6. किसी भी आयुर्वेदिक स्टोर में योगराज, चंद्रप्रभा वटी एवं शिलाजीत रसायन उपलब्ध होती है। इन सभी की 1-1 गोली का नित्य सुबह-शाम अथवा रोग की गंभीरता के अनुसार 3 बार अर्थात सुबह-दोपहर-शाम लेना गठिया रोग में बहुत ही प्रभावकारी है। इन दवाओं का सेवन योग्य चिकित्सक के परामर्श के बाद ही प्रयोग करें।

7. गठिया रोग में अधिक दर्द होने पर दिव्य पीड़ान्तक क्वाथ का सेवन रोगी को कराया जा सकता है जोकि पतंजलि स्टोर पर उपलब्ध रहती है।

गठिया रोग मे परहेज

गठिया रोग में परहेज़ का भी ध्यान रखना बहुत आवश्यक है। अच्छी से अच्छी औषधि भी तभी काम करती है जब पथ्य-कुपथ्य (परहेज़) का ध्यान रखा जाए।

इस रोग में रोगी को मीठे के सेवन से बचना चाहिए क्योंकि इससे शरीर की धमनियों में सूजन बढ़ती है। डेयरी प्रोडक्ट भी गठिया रोग में नहीं खाने चाहिए क्योंकि इसमें मौजूद प्रोटीन ऊतकों को बढ़ाते हैं जिससे रोगी का दर्द और भी बढ़ जाता है। बहुत खट्टे फल, सॉफ्टड्रिंक एवं एल्कोहल का प्रयोग किसी भी दशा में गठिया के रोगियों को नहीं करना चाहिए।

इन प्रयोगों को करने से रोगी व्यक्ति गठिया जैसे रोग से मुक्ति पा जाता है। मेथी, हल्दी, सौंठ और एलोवेरा जूस ये सभी गठिया रोग का नाश करने वाले हैं। यदि इन उपायों को नित्य परहेज़ के साथ किया जाए तो कुछ ही समय में रोगी रोगमुक्त हो जाता है।

31/01/2017

महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले अधिक नींद लेना चाहिए: शोध


आमतौर पर देखा जाता है कि महिलाएं घर के बाकी सदस्यों से पहले उठ जाती हैं। ना कि सिर्फ गृहिणियां बल्कि कामकाजी महिलाएं भी सबसे पहले उठकर घर के कामकाज में लग जाती हैं। जबकि महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले अधिक नींद की आवश्यकता होती है। वैज्ञानिक शोधों के द्वारा यह साबित हो चुका है कि चूंकि महिलाओं का मस्तिष्क पुरुषों के मुकाबले ज़्यादा जटिल होता है इसलिए उन्हें नींद की आवश्यकता भी अधिक होती है।

इंग्लैण्ड के लाफ़बरा विश्विद्यालय के प्रोफेसर जिम हॉर्न कहते हैं कि महिलाओं के चिड़चिड़ेपन, तनाव और क्रोध के प्रमुख कारणों में से एक उनका कम नींद लेना है। ऐसे मनोभाव उसी उम्र के पुरुष-महिलाओं में कम देखे जाते हैं जो भरपूर नींद लेते हैं।

8 घण्टे की नींद लेना सभी के मानसिक स्वास्थ्य एवं विकास लिए अनिवार्य समझा जाता है लेकिन प्रोफेसर के अनुसार महिलाओं का मस्तिष्क पुरुषों की तुलना में अधिक जटिल होता है इसलिए उन्हें नींद की आवश्यकता भी अधिक होती है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं का मस्तिष्क इस तरह का होता कि वे एक साथ कई काम कर सकती हैं जबकि पुरुषों का मस्तिष्क एक बार में एक ही काम करने पर केंद्रित होता है। महिलाएं बखूबी कई काम एक साथ सम्हाल लेती हैं। एक से अधिक कार्यों पर एक एकसाथ ध्यान लगे रहने के कारण पुरुषों की तुलना में महिलाओं के मस्तिष्क का अधिक भाग कार्य करता रहता है। और इस मानसिक थकान के लिए उन्हें ज़्यादा आराम की आवश्यकता होती है परंतु इसके विपरीत महिलाएं पुरुषों से कम नींद लेती हैं।

इसलिए सम्पूर्ण मानसिक स्वास्थ्य और घर में अच्छे वातावरण के बने रहने के लिए महिलाओं का चुस्त और प्रसन्न बना रहना बड़ा आवश्यक है इसलिए यदि आप यदि गृहिणी हैं या फिर कामकाजी महिला आपको अपनी दिनचर्या ऐसे व्यवस्थित करनी चाहिए कि आप भरपूर नींद ले सकें। घर के पुरुषों की भी यह ज़िम्मेदारी है कि वे घर की महिलाओं की भरपूर नींद के बारे में भी सचेत रहें।

30/01/2017

इस एक उपाय को करने से कभी नहीं होगा आपको कैंसर


 कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसका नाम सुनते ही हमारे ज़ेहन में एक डर बैठ जाता है। यह बीमारी खतरनाक होते हुए भी इतनी आम हो चली है शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जिसके किसी ना किसी प्रिय व्यक्ति की कैंसर के कारण कभी मृत्यु ना हुई हो। हालाँकि बीते कुछ सालों में काफी ऐसे केस भी सुनाई देने लगे हैं जब लोगों ने कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी को भी मात दी है। शुरुआत में ही कैंसर का पता चल जाने पर एवं सही ट्रीटमेंट लेने पर कैंसर का इलाज अब संभव है लेकिन क्या कुछ ऐसा भी किया जा सकता जिससे कैंसर से ताउम्र बचा जा सके।

Prevention is better than cure अर्थात इलाज से कहीं बेहतर है कि रोग होने ही ना पाए। अन्य रोगों की तरह कैंसर भी ऐसा ही रोग है जिससे कुछ सावधानियाँ बरतकर बचा जा सकता है क्योंकि सभी कैंसर के केसों में सिर्फ 5% लोगों को कैंसर आनुवंशिक कारणों से होता है बाकी 95% कैंसर सिर्फ जीवनशैली एवं खानपान सही ना होने के कारण होता है। इसके अलावा 75% कैंसर 55 की उम्र के बाद होता है अर्थात जीवन भर उन्होंने जिस तरह का जीवन जिया है उसी का परिणाम उन्हें उम्र के आधे पड़ाव पर देखना पड़ता है।

एक अच्छी सेहतमंद ज़िन्दगी जीना लोग जैसे भूल ही गए हैं। बचपन से ही जंक एवं प्रोसेस्ड फ़ूड खाने के कारण शरीर में विषैले तत्व जमा होने लगते हैं एवं इसका रोगप्रतिरोधक क्षमता पर बहुत बुरा असर पड़ता है। रही-सही कसर युवावस्था में नषीले पदार्थ पूरी कर देते हैं।

सबसे बड़ी बात जो समझने लायक है वह यह है कि आपका शरीर कई बार कैंसर को मात दे चुका होता है लेकिन जब मानव शरीर यह क्षमता खो बैठता है तो अंततः कैंसर अपना प्रभाव जमा लेता है। फ्री रेडिकल्स के कारण कोशिकाएं जब नष्ट होने लगती हैं तो वहीं से कैंसर पनपने लगता हैं इसलिए हमारी डाइट में एंटी ऑक्सीडेंट्स का होना बहुत ज़रूरी है।

ऐसा भोजन लेने से बचें जो बहुत ज़्यादा एसिडिक हो। लेकिन देखने में आता है कि बहुतायत में हम एसिडिक भोजन ही अधिक मात्रा में ले रहे होते हैं। शीतल पेय पदार्थ एवं सोडा इत्यादि से जितना दूर रहेंगे उतना ही आपकी सेहत के लिए वह अच्छा होगा। शरीर को रोज़ पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिलनी चाहिए इसके लिए रोज़ योग-प्राणायाम एवं हल्का व्यायाम करें।

पके हुए भोजन से ज़्यादा स्थान सलाद और फलों को दें एवं सुनिश्चित करें कि जो भी फल-सब्ज़ी आप ले रहे हैं वे कीटनाशकों से मुक्त हों। सब्ज़ी-फल इत्यादि को प्रयोग में लाने से पहले यदि उन्हें आधा घंटा नमक और नीम्बू के रस अथवा विनेगर में रखा जाए तो उनमें कीटनाशकों का असर ख़त्म हो जाता है।

आइए अब जानते हैं विशेष रूप से कैंसर से बचने के लिए कौन सा प्रयोग आप कर सकते हैं।

  • लहसुन प्रकृति का दिया अनमोल उपहार है। इसमें पाए जाने वाले तत्व कैंसररोधी होते हैं। प्रातः खाली पेट पानी के साथ इसके सेवन से कभी हृदयरोग नहीं होते एवं भोजन से 30 मिनट पहले इसकी 2-3 कली नित्य चबाने से कभी पेट का कैंसर नहीं होता।
  • देखा जाता है कि भारतीय देसी गाय का दूध पीने वालों को कभी कैंसर नहीं होता। यहाँ तक कि कई ऐसे उदाहरण हैं जिनको आख़िरी स्टेज का कैंसर था वो भी भारतीय देसी गाय का धारोष्ण (सीधा थन से निकलने वाला) दूध पीकर ठीक हो गए।
  • नित्य जवारे का रस का सेवन करने से भी कभी कैंसर नहीं होता। जवारे का रस सबसे सुलभ एवं सरल उपाय है। हर दिन मात्र एक कप जवारे के रस के सेवन से तमाम बीमारियों से बचा जा सकता है।
इस प्रकार आप यदि अच्छी जीवनशैली अपनाएंगे तथा संतुलित एवं हितकर आहार व योग-प्राणायाम करेंगे तो कैंसर जैसी रोग से सदा बचे रहेंगे। 

28/01/2017

कैसे आते हैं खर्राटे और क्या है उनका उपचार

खर्राटे एक ऐसी बीमारी है जो व्यक्ति के खुद के स्वास्थ्य के लिए चिंता का कारण तो है ही साथ में यह व्यक्ति के आस-पास सोने वाले व्यक्ति के लिए भी परेशानी का सबब बन जाता है। खर्राटे व्यक्ति तब लेता है जब सोते समय उसके मुँह में जिह्वा से जुड़ी मांसपेशियां ढीली होकर हवा के रास्ते को बंद कर देती हैं। ऐसी स्थिति में मांपेशियां वायब्रेट होकर खर्राटे की आवाज़ निकालने लगती हैं। इस वीडियो की मदद से आप इस प्रक्रिया को आसानी से समझ सकते हैं।






उपचार:


  • खर्राटे की समस्या से आमतौर पर मोटे लोग ही ग्रसित रहते हैं इसलिए इस समस्या से जूझ रहे लोगों को सबसे पहले अपना मोटापा कम करने पर ध्यान देना चाहिए। मोटापे के कारण गले के आसपास फैट जमा हो जाता है जोकि खर्राटे पैदा करने में सहायक सिद्ध होता है। [पढ़ें मोटापा दूर करें]
  • खर्राटे से परेशान लोगों को पीठ के बल नहीं सोना चाहिए क्योंकि इस स्थिति में खर्राटे आने की संभावना बढ़ जाती है।
  • किसी भी परिस्थिति में अधिक मोटा तकिया रखकर ना सोएं। खर्राटे के अलावा भी मोटे तकिये के कारण कई रोग होने की संभावना रहती है।
  • नशा और नींद की गोलियों का खर्राटों से सीधा संबंध है। नशे के कारण हमारे मस्तिष्क का नियंत्रण मांसपेशियों पे से हट जाता है और खर्राटे आने की संभावना बढ़ जाती है। धूम्रपान भी वायुमार्ग को अवरुद्ध करता है इसलिए खर्राटों से परेशान व्यक्ति को धूम्रपान से तौबा करनी चाहिए। [पढ़ें शराब से दूर रहने के कुछ मज़ेदार फायदे]
  • रात को सोने से 2 घण्टे पहले कुछ ना खाएं तथा भरपूर पानी पीकर सोएं। भोजन में नमक का इस्तेमाल कम से कम करें। क्योंकि नमक के कारण शरीर में ऐसी तरल का निर्माण होता है जो वायुमार्ग को अवरुद्ध करता है। [पढ़ें मोटापे को दावत देता नमक]
  • प्रतिदिन व्यायाम करें। व्यायाम करने से ना सिर्फ मोटापे से लड़ने में मदद मिलती है बल्कि इससे आपकी मस्तिष्क और बॉडी के बीच का तालमेल भी सुधरता है। जोकि अवचेतनावस्था में मांसपेशियों के सही संचालन के लिए बहुत ज़रूरी है।
  • खर्राटे की समस्या जड़ से ख़त्म करना हो तो नित्य 5-5 मिनट उज्जाई एवं अनुलोम-विलोम प्राणायाम करें। कुछ ही हफ़्तों में यह समस्या समाप्त हो जाएगी।