30/06/2015

बुढ़ापा दूर रखने वाला संजीवनी पेय



प्रकृति के नियमानुसार बुढ़ापा आना तो निश्चित हैं पर उचित आहार-विहार और स्वास्थ्यरक्षक नियमों का पालन करके इसे यथासंभव दूर रखा जा सकता है। इस दिशा में एक सफल सिध्द अनुभूत प्रयोग यहां प्रस्तुत किया जा रहा है- 

शरीरशास्त्री वैज्ञानिकों का मानना है कि जब तक शरीर के कोषाणुओं (Cells) का पुनर्निर्माण ठीक-ठाक होता रहेगा, तब तक बुढ़ापा दूर रहेगा और शरीर युवा बना रहेगा। जब इस प्रक्रिय में विघ्न पड़ता है और कोषाणुओं के पुनर्निर्माण की गति मंद होने लगती है, तब शरीर बूढ़ा होने लगता है।

इस वैज्ञानिक विश्लेषण से एक निष्कर्ष यह निकला कि यदि विटामिन ई, विटामिन सी और कोलीन ये तीन तत्व पर्याप्त मात्रा में प्रतिदिन शरीर को आहार के माध्यम से मिलते रहें तो शरीर के कोषाणुओं का पुनर्निर्माण बदस्तूर ठीक से होता रहेगा और जब तक यह प्रक्रिया ठीक-ठीक चलती रहेगी, तब तक बुढ़ापा दूर रहेगा। बुढ़ापा आयेगा जरूर पर देर से आयेगा। इस निष्कर्ष पर विचार करके पूना के श्री श्रीधर अमृत भालेराव ने यह निश्चिय किया कि इन तीनों तत्वों को दवाओं के माध्यम से प्राप्त करने की अपेक्षा प्राकृतिक ढंग से, आहार द्वारा प्राप्त करना अधिक उत्तम और गुणकारी रहेगा। लिहाजा काफी खोजबीन और परिश्रम करके व इस नतीजे पर पहुंचे कि विटामिन ई अंकुरित गेहूं से, विटामिन सी नींबू, शहद और आंवले से एवं कोलीन मेथी दाने से प्राप्त किया जा सकता है। इन तीनों पदार्थों का सेवन करने के लिये उन्होंने यह फार्मूला बनाया-


40 ग्राम यानी 4 चम्मच [बड़े] गेहू और 10 ग्राम मेथीदाना- दोनों को 4-5 बार साफ पानी से अच्छी तरह धो लें, ताकि इन पर यदि कीटनाशक दवाओं का छिड़काव का प्रभाव हो तो दूर हो जाये। धोने के बाद आधा गिलास पानी में डालकर चौबीस घंटे तक रखें। चौबीस घंटे बाद पानी से निकालकर एक गीले तथा मोटे कपड़े में रखकर बांध दें और चौबीस घंटे तक हवा में लटका कर रखें। गिलास का पानी फेंकें नहीं, इस पानी में आधा नींबू निचोड़कर दो ग्राम सोंठ का चूर्ण डाल दें। इसमें 2 चम्मच शहद घोलकर सुबह खाली पेट पी लें। यह पेय बहुत शक्तिवर्धन, पाचक और स्फूर्तिदायक है, इसीलिये इसका नाम श्रीभालेराव ने संजीवनी पेय रखा है। चौबीस घंटे पूरे होने पर हवा में लटके कपड़े को उतारकर खोलें और गेहूं तथा मेथीदाना एक प्लेट में रखकर इस पर पिसी काली मिर्च और सेंधा नमक बुरक दें। गेहूं और मेथीदाना अंकुरित हो चुका होगा। इसे खूब चबा-चबाकर प्रात: खायें। यदि इसे मीठा करना चाहें तो काली मिर्च और नमक न डालकर गुड़ मसलकर डाल दें, शक्कर न डालें। यह मात्रा एक व्यक्ति के लिये हैं।

इस फार्मूले का सेवन करने से तीन तत्व तो शरीर को प्राप्त होते ही हैं, साथ ही एनजाइम्स, लाइसिन, आइसोल्यूसिन, मेथोनाइन आदि स्वास्थ्यवर्धक पौष्टिक तत्व भी प्राप्त होते हैं। यह फार्मूला सस्ता भी है और बनाने में सरल भी इसमें गजब की शक्ति है, यह स्फूर्ति और पुष्टि देने वाला है। इस प्रयोग को प्रौढ़ ही नहीं, वृध्द स्त्री पुरुष भी कर सकते हैं। यदि दांत न हों या कमजोर हों तो वे अंकुरित अन्न चबा नहीं सकते, ऐसी स्थिति में निम्नलिखित फार्मूले का सेवन करना चाहिए-

प्रात:काल एक कटोरी गेहूं और तीन चम्मच मेथीदाना अच्छी तरह धो-साफ कर चार कप पानी में डालकर चौबीस घंटे रखें। दूसरे दिन सुबह इसका एक कप पानी लेकर नींबू तथा शहद डालकर पी लें। शेष तीन कप पानी निकाल कर फ्रिज में रख दें। यदि फ्रिज न हो तो पानी गिलास में डालकर गिलास पर गीला कपड़ा लपेट दें और गिलास ठंडे पानी में रख दें और ढंक दें, ताकि पानी शाम तक खराब न हो। इस पानी को शाम तक एक कप पीकर समाप्त कर दें। गेहूं और मेथीदाने को फेंकें नहीं बल्कि फिर से 4 कप पानी में डालकर रख दें। दूसरे दिन सुबह 1 कप पानी और शेष दिन भर में पी लें। अब नया गेहूं तथा मेथीदाना लें और सुबह पानी में डालकर रख दें। दो दिन तक भिगोये हुए गेहूं और मेथी दाने को सुखा लें और पिसाने के रखे गये गेहूं में मिला दें। इस तरह बिना दांत वाले भी इस नुस्खे का सेवन कर लाभ उठा सकते हैं।

सौजन्य: कल्याण, आरोग्य अंक 2001, पृष्ठ संख्या 358

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